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खाकी पहन घरों में रहने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे नरेश

हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं नरेश सागवाल !!!!

(देवीलाल बारना)कुरुक्षेत्र। देश में कोरोना की एंट्री हुए दो माह बीत चुके हैं, ऐसे में सरकार द्वारा 24 मार्च को लॉकडाउन कर दिया गया। लॉकडाउन के दौरान जहां पुलिस सख्ती से लोगों को अपने घरों में रहने के लिए कह रही हैं वहीं पुलिस का दूसरा रूप भी देखने को मिल रहा है जिसमें हरियाणा पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को घरों में रहने के लिए कह रहे हैं। जी हां, कुरुक्षेत्र पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात नरेश सागवाल यूं तो एक रंगकर्मी भी हैं लेकिन अब कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन की पालना वे अपनी कविताओं के माध्यम से खूब करवा रहे हैं। नरेश सागवाल द्वारा पुलिस की वर्दी में बोली गई कविताएं आजकल खूब वायरल हो रही हैं। नरेश सागवाल ने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को संदेश दिया है कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। बता दें कि नरेश सागवाल समय-समय पर नाटकों का मंचन कर लोगों का मनोरंजन करने के साथ समाज में अच्छाई का प्रसार करते हैं वहीं हरियाणा पुलिस द्वारा शुरु किए गए कार्यक्रम राहगिरी का आयोजन कुरुक्षेत्र जिले में जब भी होता है, नरेश सागवाल ही मंच का संचालन करते हैं। इसके अलावा भी नरेश सागवाल अपनी पुलिस की डयूटी में से समय निकालकर लोगों को जागरूक करते रहते हैं।

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नरेश सागवाल की कविताएं सोशल मीडिया पर खूब हो रही वायरल

नरेश सागवाल द्वारा कोरोना व खाकी पर कविता के माध्यम से अपने भाव प्रकट किए हैं। सागवाल ने एक खाकी कविता हरियाणा व भारत में तेजी से बढ रहे कोरोना के प्रकोप कविता को हिंदी में बोला है। नरेश सागवाल द्वारा बोली गई दोनों कविताएं आजकल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।

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नरेश सागवाल द्वारा लिखी हरियाणवी कविता


लोग चाहे कुछ भी कह ल्यौ, पर सबकी जान बचावै सै खाकी,

जबै तो हर मुसीबत मै सबतै आगै खडी पावै सै खाकी।


करोना की महामारी मै भी हाम अपना फर्ज निभारै सैं,

अपने बच्चे अर परिवार छोडकै, लोगां ना समझारे सैं।

थाम सब घर मै रहो सुरक्षित, जबै तै हाम बाहर लिकड कै आरे सैं,

हाथ जोडकै, गाणे गाकै सबनै न्यू समझारे सैं,

हाम सत्या और निष्ठा की कसम निभारे सैं, जो ट्रेनिंग मै खावै सै खाकी।

जबै तो हर भीड पडी मै सबतै आगै खडी पावै खाकी।


आग, भूकंप या आपदा, हर संकट मे हाम डटे खडे,

कोय पत्थर मारो या गाली दे, धैर्य मै हाम घणे बडे।

नही सै तमन्ना कोय हामनै, घणा सम्मान पावण की,

बस एक ए कसम उठा राखी सै देश तै कोरोना भगावण की,

कोरोना के इस संकट मै भी सेवा, सुरक्षा अर सहयोग निभावै सै खाकी।

जबै तो हर मुसीबत मै सबतै आगै खडी पावै सै खाकी।


हो सकै कुछ कमियां होगी, पर बुराई किसमै नी होन्दी रै,

सोच के देखो के होन्दा जे आज पुलिस ना होन्दी रै,

थाम अपने-अपने घर मै रहकै देश सेवा मै योगदान करो,

सारा कुणबा घरां बैठकै अपने प्रभु का थाम ध्यान करो,

कुछ दिन ऐसो आराम कुर्बान करो बस या ऐ बात समझावै सै खाकी।

जबै तो हर मुसीबत मै सबतै आगै खडी पावै सै खाकी।


हाथ जोडकै कह रया सूँ, बस इतना कहण पुगाईयो रै ,

अपणै घर के भीतर रहीयो, मत बाहर लिकडकै आईयो रै,

इस कोरोना नै थाम दे कै मात, देश का मान बढ़ाईयो रै ,

एक बै यो बैरी मरजै, फेर चाहे रोज त्यौहार मनाईयो रै,

नरेश कुमार भी फर्ज के खात्तर, रोज या पावै सै खाकी

जबै तै हर मुसीबत मै सबतै आगै खडी पावै सै खाकी।

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