Search
  • KUK NGO

बच्चों के लिए कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है !

राज्यपाल अवार्डी सुभाष चौहान से खास बातचीत!स्टेटस सिंबल के लिए अपने बच्चों को तनाव में डाल रहे अभिभावक, कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है बच्चों के लिए तनाव

देवीलाल बारना आज पूरी दुनिया को कोरोना वायरस ने डरा रखा है। कोरोना का भय भी इतना है कि लोग दूसरे देशों में जाने से भी भय खा रहे हैं। जहाज में सफर करने वालों को डर सताता है कि कहीं वे भी इसकी चपेट में न आ जाएं। वायरस को देखते हुए एयरलाईंस, टे्रन व बसों सहित सभी यातायात के साधन बंद किए हुए हैं। कोरोना वायरस एक दम से लोगों के सामने आ गया तो इतना डर सता रहा है, लेकिन इससे भी ज्यादा खतरनाक बीमारी आज हर घरों में पनप रही है, वह है तनाव। हाल ही में कोरोना के कारण परिक्षाओं को रद्द किया गया। हर किसी के मन में यह होता है कि मेरा बच्चा कितने अच्छे नंबरों से पास होगा, लेकिन बच्चें के मन में कितना तनाव उत्पन्न हो रहा है, इस बारे में शायद ही कोई सोचता होगा।

बच्चों में क्यों तनाव पैदा हो रहा है और तनाव को कैसे कम किया जाए, केयूके एनजीओ से खास में बातचीत में राज्यपाल अवार्डी सुभाष चौहान ने टिप्स दिए। किसी भी कार्य के लिए बच्चों को करे तैयार सुभाष चौहान ने कहा कि जिस प्रकार से फसल उगाने के लिए खेतों को तैयार करना जरूरी होता है, ठीक उसी प्रकार किसी भी कार्य को करने के लिए बच्चों का तैयार होना जरूरी है। हम अपने बच्चों को तैयार नही कर पाते और बच्चे तनाव में आ जाते हैं। यह तनाव एक दिन ऐसी स्थिति में चला जाता है कि बीमारी का रूप ले लेता है। जिसके भयानक परिणाम सामने आते हैं। एक आंकडे के कारण लगभग 20 हजार बच्चे मौत का शिकार बनें। विकराल रूप को पहचानना है जरूरी तनाव कितनी बडी बीमारी है इसको जानना सबसे ज्यादा जरूरी है। तनाव राक्षस के रूप में बच्चों में बैठा है। हमे जानना होगा कि हमारा बच्चा तनाव में कब आ रहा है। इसके कई कारण हो सकते हैं हमे जानना होगा कि बच्चा कब तनाव में आ रहा है। जिसमें बच्चे का किताबों से ध्यान हट जाना, बच्चे का कम बोलने लग जाना सहित कई कारण हो सकते हैं। इसलिए अपने बच्चों के तनाव में आने के कारणों को समझें। बच्चों के सिर पर न लादें अपनी इच्छा ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों के सिर पर अपनी इच्छाओं को लाद देते हैं जिसमें परीक्षा में ज्यादा नंबर लाना प्रमुख है। ऐसे में बच्चों को लगता है कि ज्यादा नंबर न आए तो वह क्या करेगा, जिससे बच्चों में तनाव पैदा होता है। परीक्षा में नंबर आना मात्र एक पैमाना है। ज्यादा नंबर लाने की विचारधारा को छोडना होगा। मोइक्रोसॉफ्ट के बिल गेटस इसका बडा उदाहरण हैं वे परीक्षा में फेल भी हुए लेकिन बावजूद इसके दुनिया की सबसे बडी कंपनी इन्होने खडी की। ध्यान तनाव को रोकने की बडी दवा हमें चाहिए कि अपने बच्चों को धार्मिकता की तरफ लेकर जाएं। बच्चों को ध्यान में बैठाएं, अपने इष्ट देव की पूजा करवाएं। पुराने समय में जब बच्चे धार्मिकता से जुडे थे तो तनाव बच्चों में नही था। लेकिन पिछले एक दशक में जब से हम धार्मिकता से दूर हुए हैं तब से तनाव बढा है। शिक्षण संस्थाओं को आना होगा आगे चौहान ने कहा कि बच्चों में तनाव पैदा न हो इसके लिए शिक्षण संस्थाओं को आगे आना चाहिए व बच्चों व अभिभावकों को समझाना चाहिए व स्कूल-कॉलेजों में इस प्रकार का माहौल बनाना चाहिए जिससे बच्चों में तनाव पैदा ही न हो। बच्चों को अपनी इच्छा के अनुसार ही आगे बढाने देना चाहिए। शिक्षा को स्टेटस सिंबल न बनाएं चौहान ने कहा कि आजकल शिक्षा को लोगों ने स्टेटस सिंबल बना लिया है। इसको छोडना होगा ताकि बच्चे अपने जीवन को इंजाय कर सके। परीक्षा के दौरान बच्चों को समझाएं कि बंद आंख करके कुछ देर अपने इष्ट देव को याद करें और मैडिटेशन करें। दो मिनट भी मैडिटेशन कर लिया जाए तो तनाव दूर हो जाता है।

737 views0 comments